Saturday, October 19, 2013

कासे कहूँ

बड़ी विडम्बना है एक पुरुष की
जो हो गए 40 के पार
अब दिल बच्चा हो तो भी दिखना है गंभीर
जी ललचाये चोकलेट पर तो भी दे दो अपने बच्चो को
मन करे की घास के मैदान में दौड़ लगाई जाये पर हसी उड़ने का डर
यूँ ही जी लो अब
अपना मन मार कर
आखिर तुम हो एक पिता पति और पुत्र
जो ना चाहते हुए भी बड़ा हो गया है।